Zindagi Rang Shabd

Zinddagi Ke Rang aur Rango ke Shabd

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Jaishree Verma


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मेरा स्वतंत्र भारत

Posted On: 15 Aug, 2013  
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सवाल

Posted On: 13 Aug, 2013  
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बोलती,खामोश रात

Posted On: 6 Aug, 2013  
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बापू मुझे आने दो

Posted On: 31 Jul, 2013  
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जागृति जोश

Posted On: 24 Jul, 2013  
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हम बिन तुम

Posted On: 15 Jul, 2013  
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बस थोड़ा सा

Posted On: 28 Jun, 2013  
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Others मस्ती मालगाड़ी लोकल टिकेट में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

मेरा मानना है कि हिंदी भाषा ही एक मात्र भाषा है जो हिन्दुस्तान के एक कोने से दूसरे कोने तक बोली और समझी जाती है अतः हिंदी सम्मानजनक स्थिति में है या नहीं ? इसे मुख्य धरा में होना चाहिए या इसे मुख्य धरा में लाने का प्रयास करना चाहिए | इस तरह कि बातें मेरी दृष्टि में कोई मायने नहीं रखतीं | क्यों कि जो भाषा सर्व ग्राह्य हो ,एक देश कि पहचान हो उसे अपने वजूद के लिए सहारों कि क्या आवश्यकता ? अंग्रेजी भाषा अंतर्राष्ट्रीय भाषा है उसे सीखना और समझना एक तबके के लिए या फिर कहना चाहिए विदेशी कम्पनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए आवश्यक माना जा सकता है परन्तु इससे हिंदी के लिए कोई भय कि स्थिति नहीं बनती हाँ हिन्दुस्तान में रह कर आप यदि हिंदी नहीं समझते तो यह अवश्य विचारणीय स्थिति होगी | एकदम सही लिखा आपने जय श्री जी ! और आपकी लेखन शैली , पहले काव्य फिर विस्तृत लेखन , प्रभावित करता है ! अपने ब्लॉग पर आपके विचारों का स्वागत करता हूँ http://www.jagranjunction.com/2013/09/20

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: vaidya surenderpal vaidya surenderpal

ब्लॉग एक माध्यम है लेखकों और कवियों के लिए अपने विचार व्यक्त करने का , अपनी बात कहने का , अपने अन्दर के झंझावात या गहरे भावों को शब्दों में बाँध कर लोगों तक पहुंचाने का और जब नव परिवर्तनों का दौर हो तो हमारे कवि और लेखक पीछे कैसे रह सकते हैं ? हिंदी एक बहुत ही मधुर ,सहज ,ग्राह्य और अपनत्वपूर्ण माध्यम है लोगों को लोगों से जोड़ने का | इस भाषा संग नित नए लेखक और कवि बढ़ रहे हैं | ब्लॉगिंग के जरिये एक मंच मिल जाता है , सबको जहां हम बेबाक हो अपनी बात रख सकते हैं | हर समय काल के साथ परिवर्तन अवश्यम्भावी है | स्वाभाविक है , हिंदी भी इससे अछूती नहीं रह सकती | नए लेखकों संग हिंदी को नया कलेवर ओढ़ना ही है , यह हर तरह से समृद्ध भाषा है इसी लिए यह श्रेष्ठ है | हिंदी ब्लोगिंग के पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत करती सार्थक पोस्ट ! बधाई आदरणीय जय श्री वर्मा जी आपको , बढ़िया लेखन के लिए

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

हमारे देश की धरती को हम धरती माँ कहते हैं और हिंदी को राष्ट्र भाषा मानती हूँ मैं | हिंदी तो माथे की बिंदी है जो देश के भाल पर शोभित बिंदी के सामान दमकती रहती है , फिर वह समर्थ , असमर्थ , गरीबों की बोली या अनपढ़ों की बोली इस विवाद से बिलकुल परे सर्वश्रेष्ठ है | इस धरती ने हिंदी में लिखने वाले कई लेखकों और कविओं को जन्म दिया है और पाठकों ने भी खुले दिल से हिंदी को पूर्ण सम्मान के साथ अपनाया है | आज तक हिंदी कवि , लेखक अपना लोहा मनवाते रहे हैं और आने वाले समय में भी समृद्ध हिंदी भाषा के , हिंदी से समृद्ध लेखक आते ही रहेंगे और हिंदी तथा अपनी पहचान बनाते ही रहेंगे |हमें गर्व है अपने देश पर , अपनी धरती माँ पर और अपनी भाषा हिंदी पर | हिंदी को समर्पित बहुत प्रभावी और तेज तर्रार लेख दिया है आपने आदरणीय जय श्री वर्मा जी ! हार्दिक शुभकामनायें !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

जयश्री जी, आपने अपने बचपन की नोक झोंकों से चक्षु भीगा दिए ! मेरा दिल बहुत नाजुक है और मैं जल्दी ही भावुक होजाता हूँ, पढ़ते पढ़ते मैं स्वयं पात्र बन जाता हूँ ! मेरी भी एक बहिन है दो तीन साल में उससे मिलना हो पाता है ! रक्षा बंधन के दिनों पिछले दस सालों से अमेरिका आजाता हूँ ! वैसे भी मेरी बहींन मेरे से १० साल छोटी है, जब वह शरारत करने वाली हुई मैं सेना में चला गया ! दिल्ली में एक लड़की एक कार्यालय में मिली उसने मुझे भय्या बना दिया ! फ़ौजी एक जगह तो रहता नहीं मेरी पोस्टिंग मिज़ो राम होगई, कुछ दिन पत्र व्यवहार रहा अब पता नहीं वह किस शहर में है ! सुन्दर और गुद गुदाने वाला लेख है बधाई ! रक्षा बंधन पर शुभ कामनाएं ! हरेन्द्र जागते रहो !

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

के द्वारा: deepakbijnory deepakbijnory

के द्वारा: rajkum111shayar rajkum111shayar

के द्वारा: Sumit Sangwan Sumit Sangwan

किसी के हाथ मेहँदी सजी,कोई विवाह के नाम जल गयी, जीवन संगिनी थी वो फिर क्यों,दहेज की बलि चढ़ गयी । बड़े-बड़े खिलाड़ियों के खेलों की,होती करोड़ों की सेटिंग, कौन कितना खेलेगा उसके ही,हिसाब से उसकी रेटिंग। कभी राज़ को राज़ रखने के बदले,कोई जान ली जाती है, फिर अगले दिन उजाले में,झूठी तहकीकात की जाती है। दशहरा,दुर्गापूजा,रमजान,क्रिसमस के जश्न भी होते हैं, कहीं बहुतों को समेट गोद में जलते,शमशान भी रोते हैं। कहीं घरों में चुपचाप खौफ़नाक,इरादों संग लुटेरे घुसते हैं, किसको दोष दूँ मैं अपनी खलाओं का , कुछ तो दोष होगा मेरी ही वफाओं का ! आदरणीय जय श्री वर्मा जी , मुझे लगता है मैंने अपनी बात कही दी है

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: Sumit Sumit

जो क्रिकेट मैच जोर शोर से चल रहा है यहाँ -वहाँ, सारा का सारा टाइम-पास बस धोखा और दिखाऊ है। ये न सोचा कि भारतीयों की धड़कन बसती है क्रिकेट में, दोस्तों की दिन-रात की बातें हैं बस बॉल और विकेट में, हम खाना-पीना भूलकर क्रिकेट को देते हैं प्राथमिकता, चाहे कोई जरूरी काम हो चाहे कैसी भी हो आवश्यकता। अगर बोर्ड एग्जाम में क्रिकेट मैच लिखने को आता है, तो बेटा पढ़ाई छोड़छाड़ टीवी के सामने ही डट जाता है, पापा,मैच जब पूरा देखूँगा तभी तो निबन्ध लिख पाऊंगा, फिक्सिंग के पॉइंट्स बताओ तभी तो नंबर पूरे लाऊँगा। खिलाड़ियों की फोटो काट-काट हम किताबों में रखते हैं, उनके बड़े-बड़े पोस्टर हमारे घर की दीवारों पर सजते हैं, अलग विषय पर बहुत सही रचना

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat




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