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गर हम न होंगे

Posted On: 4 Jun, 2014 Others,कविता,Others में

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मित्रों ! मेरी यह रचना आज के समाचार पत्र नवभारत टाइम्स ( नई दिल्ली / लखनऊ संस्करण )
के दिनॉंक – 4/5/14 , पृष्ठ संख्या -15 पर प्रकाशित हुई है। आप भी इसे पढ़ें।

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क्यों कोख से बुढ़ापे तक तुम यूँ हमारा वजूद मिटाते हो,
कभी हमले,कभी तेज़ाब,कभी शब्दों के नश्तर चुभाते हो।

हम ही हैं जो जन्म दे तुम्हें ममत्व से पोषित करते हैं,
धूल,धूप,आंधी,पानी और बुरी नज़रों से दूर रखते हैं।

हम अपने आँचल की छाँव में तुम्हें महफूज़ बनाते हैं,
तुम्हारा वजूद प्रेरित कर तुममें हौसलों को जगाते हैं।

हम ही हैं जो अहम् को तुम्हारे अंदर जीवित रखते हैं,
रिश्ते,सलीका,दुनिया भर की खुशियाँ तुममें भरते हैं।

माँ,बीबी,बहन,बेटी,बनकर घर को घर हम ही बनाते हैं,
हम हैं जो तुम्हें भाई,पिता,सनम के मायने समझाते हैं।

सोचो गर हम न होंगे तो तुम किससे दिल लगाओगे,
किस संग घर बसाओगे,किस संग सपने सजाओगे।

हम न होंगे गर दुनिया में तो,तुम किसके गीत गाओगे,
किसपे गीत,गज़ल लिखोगे,किसके किस्से बनाओगे।

अरे ! बिन हमारे अपने जीवन का,वज़ूद तो बता के देखो,
हर गली,मोहल्ले,बाजारों से जरा रंगों को तो हटा के देखो।

अपनी ही ज़िन्दगी की भयावह वीरानियों से कांप जाओगे,
अरे हमें बचाओ,हमें सहेजो,तभी जीवन को जान पाओगे।

( जयश्री वर्मा )



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    Jaishree Verma के द्वारा
    June 12, 2014

    बहुत -बहुत धन्यवाद yogi sarswat जी !

sadguruji के द्वारा
June 8, 2014

अरे ! बिन हमारे अपने जीवन का,वज़ूद तो बता के देखो, हर गली,मोहल्ले,बाजारों से जरा रंगों को तो हटा के देखो। अपनी ही ज़िन्दगी की भयावह वीरानियों से कांप जाओगे, अरे हमें बचाओ,हमें सहेजो,तभी जीवन को जान पाओगे। सरल भाषा में बहुत सुन्दर और शिक्षाप्रद रचना ! अच्छे और उपयोगी लेखन के लिए शुभकामनाएं !

    Jaishree Verma के द्वारा
    June 9, 2014

    प्रतिष्ठा में,Sadguruji , कविता पर विचार व्यक्त करने के लिए आपका धन्यवाद !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 4, 2014

बहुत सुंदर ,सार्थक एवं सटीक अभिव्यक्ति .हार्दिक बधाई जयश्री जी .

    Jaishree Verma के द्वारा
    June 9, 2014

    प्रतिष्ठा में,निर्मला सिंह गौर जी ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद !


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