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( contest )3 - सर्वोपरि ही सम्माननीय

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विषय – ” क्या हिंदी सम्मानजनक भाषा के रूप में मुख्य धारा में लाई जा सकती है? अगर हां, तो किस प्रकार? अगर नहीं, तो क्यों नहीं? “

सर्वोपरि ही सम्माननीय

यह भाषा अमीर-गरीब का भेद न जाने ,

यह धर्म-अधर्म का कोई दोष न माने ,

सबको एक धरातल पर ये लेकर आये ,

ये एक मीठी सी,सरल,अदृश्य डोर है ।

जहां हिंदी ही जन्म है,हिंदी ही कर्म है ,

यह हिंदी जीवन और हिंदी ही धर्म है ,

यह हिंदी ही हमारी दिन और रात है ,

यह हिन्दुस्तानी होने की सौगात है ।

हिंदी भाषा भाषाओं का आत्मबल है ,

हिंदी भाषा भूत,वर्तमान,और कल है ,

यह हिंदी भाषा सात सुरों का संगीत है ,

ये भाषा हिन्दुस्तान का अमर गीत है ।

ये हिंदी हिन्दुस्तानी होने की कसम है ,

ये हिंदी हिन्दुस्तानी होने की रस्म है ,

ये हिंदी भाषा ही हम सबकी पहचान है ,

हिंदी भाषा ही सब भाषाओं की जान है ।

ये हिंदी हमारी आन-बान-शान है ,

ये हिंदी ही हम सबका स्वाभिमान है ,

ये न हिन्दू,न मुस्लिम,न सिख,इसाई ,

हिंदी है बहन तो हर हिन्दुस्तानी है भाई ।

यह तो कहीं भी,कभी भी,गयी ही नहीं थी ,

हर विकास के साथ ही साथ आगे बढ़ी थी,

ये भाषा तो मुख्य धारा में सदा ही रही है ,

मानव उत्थान के साथ ही परवान चढ़ी है ।

यह भाषा सार्थक है या फिर है निरर्थक ?

यह अमीरों की है या फिर है गरीबों की ?

शिक्षितों की है या ये है अशिक्षितों की ?

इस संग सम्मान की,या अपमान की बात है ?

ये सब प्रश्न मुझे तो लगते हैं व्यर्थ ,

इन प्रश्नों का नहीं है कहीं कोई अर्थ ,

यह तो माँ की बोली,माँ के ही है सदृश्य,

इसमें अपनेपन का है अनूठा सा स्पर्श ।

यह ही हिन्दुस्तान की मुख्य भाषा है,

जन-जन को जोड़ने की इक यही आशा है ,

इस भाषा के बोल हिन्दुस्तानी इतिहास रचते है,

हमारे राष्ट्र गीत,राष्ट्र गान इसमें ही सजते हैं।

यह मुख्य थी,मुख्य है सदा मुख्य ही रहेगी,

पूरे भारत की चहेती भाषा सब संग सजेगी,

अंग्रेजी या अन्य भाषाएँ कुछ बिगाड़ न सकेंगी,

आईं जो बीच में तो सब संग-संग ही चालेंगी ।

सर्वोपरि को नहीं है,कोई डर किसी अन्य का ,

उसमें ग्राह्यता और बल है,सबके संग बढ़ने का ,

गर बढ़ी अन्य भाषा,उसे गले लगाकर चलेगी,

सर्वोपरि है हिंदी भाषा,सदा सर्वोपरि ही रहेगी ।

मेरा मानना है कि हिंदी भाषा ही एक मात्र भाषा है जो हिन्दुस्तान के एक कोने से दूसरे कोने तक बोली और समझी जाती है अतः हिंदी सम्मानजनक स्थिति में है या नहीं ? इसे मुख्य धरा में होना चाहिए या इसे मुख्य धरा में लाने का प्रयास करना चाहिए | इस तरह कि बातें मेरी दृष्टि में कोई मायने नहीं रखतीं | क्यों कि जो भाषा सर्व ग्राह्य हो ,एक देश कि पहचान हो उसे अपने वजूद के लिए सहारों कि क्या आवश्यकता ? अंग्रेजी भाषा अंतर्राष्ट्रीय भाषा है उसे सीखना और समझना एक तबके के लिए या फिर कहना चाहिए विदेशी कम्पनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए आवश्यक माना जा सकता है परन्तु इससे हिंदी के लिए कोई भय कि स्थिति नहीं बनती हाँ हिन्दुस्तान में रह कर आप यदि हिंदी नहीं समझते तो यह अवश्य विचारणीय स्थिति होगी |

हिंदी में हमारी जड़ें हैं , हिंदी हमारी पहचान है अतः हिंदी ही सर्वोपरि है और सम्मानजनक भाषा है | और यह सर्वोपरि ही रहे उसके लिए हमारे दफ्तरों और सरकारी कामकाज को हिंदी में किये जाने के प्रयास करने होंगे ताकि आम जनता के लिए सरकारी काम में भाषा आड़े न आये और सरकारी कामकाज सर्वग्राह्य हो ,सुगम हो | हम हिन्दुस्तानी हैं विश्व पटल पर हमारी भाषा हिंदी ही पहचानी जाती है | हमारे देश में विभिन्न प्रान्तों की विभिन्न भाषाओं में हिंदी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है , यह सर्वोपरि है अतः सर्वाधिक सम्माननीय भी |

सर्वोपरि को नहीं है,कोई डर किसी अन्य का ,
उसमें ग्राह्यता और बल है,सबके संग बढ़ने का ,
गर बढ़ी अन्य भाषा,उसे गले लगाकर चलेगी,
सर्वोपरि है हिंदी भाषा,सदा सर्वोपरि ही रहेगी ।

( जयश्री वर्मा )



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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yatindranathchaturvedi के द्वारा
September 28, 2013

बेहतरीन

    Jaishree Verma के द्वारा
    October 7, 2013

    बहुत -बहुत धन्यवाद यतीन्द्रनाथ चतुर्वेदी जी 1

Pankaj के द्वारा
September 28, 2013

बहुत खूबसुरत रचना

    Jaishree Verma के द्वारा
    October 7, 2013

    प्रतिष्ठा में ,पंकज जी ,आपका बहुत – बहुत धन्यवाद !

yamunapathak के द्वारा
September 27, 2013

जय श्री जी बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति है

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 28, 2013

    प्रतिष्ठा में , यमुना पाठक जी , लेख पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद |

yogi sarswat के द्वारा
September 27, 2013

मेरा मानना है कि हिंदी भाषा ही एक मात्र भाषा है जो हिन्दुस्तान के एक कोने से दूसरे कोने तक बोली और समझी जाती है अतः हिंदी सम्मानजनक स्थिति में है या नहीं ? इसे मुख्य धरा में होना चाहिए या इसे मुख्य धरा में लाने का प्रयास करना चाहिए | इस तरह कि बातें मेरी दृष्टि में कोई मायने नहीं रखतीं | क्यों कि जो भाषा सर्व ग्राह्य हो ,एक देश कि पहचान हो उसे अपने वजूद के लिए सहारों कि क्या आवश्यकता ? अंग्रेजी भाषा अंतर्राष्ट्रीय भाषा है उसे सीखना और समझना एक तबके के लिए या फिर कहना चाहिए विदेशी कम्पनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए आवश्यक माना जा सकता है परन्तु इससे हिंदी के लिए कोई भय कि स्थिति नहीं बनती हाँ हिन्दुस्तान में रह कर आप यदि हिंदी नहीं समझते तो यह अवश्य विचारणीय स्थिति होगी | एकदम सही लिखा आपने जय श्री जी ! और आपकी लेखन शैली , पहले काव्य फिर विस्तृत लेखन , प्रभावित करता है ! अपने ब्लॉग पर आपके विचारों का स्वागत करता हूँ http://www.jagranjunction.com/2013/09/20

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 28, 2013

    प्रतिष्ठा में ,योगी सारस्वत जी , मेरी लेखन शैली पर आपकी सार्थक टिप्पणी के लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद !

Ritu Gupta के द्वारा
September 25, 2013

सुंदर प्रस्तुति आभार

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 27, 2013

    प्रतिष्ठा में , Ritu Gupta जी ! रचना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए आपका धन्यवाद !

Santlal Karun के द्वारा
September 25, 2013

अत्यंत सर्वोपरि !!! और … “सर्वोपरि को नहीं है डर किसी अन्य का , उसमें तो है क्षमता,सबके संग बढ़ने का ,” …, हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 27, 2013

    प्रतिष्ठा में , Santlal Karun जी ! रचना पर आपके हार्दिक विचारों के लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद ! रचना पर आपके विचारों का सदा ही स्वागत है !


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