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( contest )2 - ब्लॉग की ओढ़नी संग हिंदी

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विषय – “नव परिवर्तनों के दौर में हिन्दी ब्लॉगिंग”

ब्लॉग की ओढ़नी संग हिंदी

हिंदी माला के मोती हैं ये ,
१३ स्वर और ३६ व्यंजन,
हर शब्द पूर्ण बनाते हैं ये,
सार्थक भाषा,भावों का दर्पण।

आँखें खोलीं तो माँ की गोदी,
माँ की हिंदी और माँ की बोली,
मातृ भाषा का मर्म पहचाना,
हिंदी,हिन्दुस्तान को जाना ।

प्रदेश कई हैं और भाषा अनेक ,
पर इन सबमें सर्वश्रेष्ठ है एक ,
सबको आत्मसात यह करती ,
अदभुत भाषा,सरल और नेक ।

उत्तर से दक्षिण तक जाओ ,
पूरब से पश्चिम तक आओ ,
कोई प्रांत या कोई मजहब हो ,
हिंदी भाषा हर जगह ही पाओ ।

जहां – जहां पे मानव बसता है ,
हिंदी के नए इतिहास रचता है ,
भारत शरीर तो हिंदी है धड़कन,
अपनेपन में डूबा जन – जन ।

नित नए – नए श्रृंगार है करती ,
नए शब्दों संग सजती संवारती ,
नित नवयौवना सा रूप है धरती ,
अन्य भाषाओं को साथ ले चलती।

सदा संभावनाएं इस संग जागें ,
प्रेम , सदभावना इस संग साजे ,
नव परिवर्तन संग नव रूपों संग ,
बांधे हम सबको इसका अपनापन।

हिंदी लेखक और हिंदी ब्लॉगिंग ,
भिन्न व्याख्या भिन्न भावों के रंग,
नए विचार और नए लेखकों के ढंग ,
इठलाती है यह,हर नई कलम संग ।

या फिर परिवर्तन का दौर नया हो ,
मंच,कलम,शब्द या ठौर नया हो ,
यह हर जगह खुद को है रमाति ,
हर जगह खुद को श्रेष्ठ बनाती ।

ब्लॉग एक माध्यम है लेखकों और कवियों के लिए अपने विचार व्यक्त करने का , अपनी बात कहने का , अपने अन्दर के झंझावात या गहरे भावों को शब्दों में बाँध कर लोगों तक पहुंचाने का और जब नव परिवर्तनों का दौर हो तो हमारे कवि और लेखक पीछे कैसे रह सकते हैं ? हिंदी एक बहुत ही मधुर ,सहज ,ग्राह्य और अपनत्वपूर्ण माध्यम है लोगों को लोगों से जोड़ने का | इस भाषा संग नित नए लेखक और कवि बढ़ रहे हैं | ब्लॉगिंग के जरिये एक मंच मिल जाता है , सबको जहां हम बेबाक हो अपनी बात रख सकते हैं | हर समय काल के साथ परिवर्तन अवश्यम्भावी है | स्वाभाविक है , हिंदी भी इससे अछूती नहीं रह सकती | नए लेखकों संग हिंदी को नया कलेवर ओढ़ना ही है , यह हर तरह से समृद्ध भाषा है इसी लिए यह श्रेष्ठ है |
जब बात हो नवीनता की ,परिवर्तन की तो भला हिंदी पीछे कैसे रह सकती है , मानव ने जैसे – जैसे विकास किया हिंदी भी साथ ही साथ नए – नए सोपान चढ़ती गई , नए इतिहास रचती गई और आज यह श्रेष्ठ और सर्व ग्राह्य भाषा बन कर उभरी है | यह हिन्दुस्तानियों के साथ जाकर विदेशों में भी बस गई है और वहां पर भी अपनी पहचान के साथ खुशहाल हो फल – फूल रही है | विदेशों में भी हिंदी ब्लॉग पढ़ने वाले लोग हैं | कारण है इसकी मधुरता और सबको अपनेपन के अहसास में डुबो देने का गुण | इस भाषा ने स्वयं को समय के साथ बढ़ाया है और नव परिवर्तन के साथ सदा ही यह अपनी पहचान बनाए रखने में सफल हुई है | जब तक हिन्दुस्तान है , तब तक हिंदी भी रहेगी और तब तक हिंदी ब्लॉग लिखने वाले भी रहेंगे , नित नए – नए प्रयोगों के साथ , नित अपनी कलम से निकले नए – नए रंगों के साथ |

हिंदी लेखक और हिंदी ब्लॉगिंग ,
भिन्न व्याख्या भिन्न भावों के रंग,
नए विचार और नए लेखकों के ढंग ,
इठलाती है यह,हर नई कलम संग ।

( जयश्री वर्मा )



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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bhanuprakashsharma के द्वारा
September 22, 2013

सुंदर रचना के लिए बधाई। 

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 24, 2013

    प्रतिष्ठा में , भानु प्रकाश शर्मा जी , रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद !

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 22, 2013

    प्रतिष्ठा में , पंकज जी , आपका बहुत – बहुत धन्यवाद ! आपके द्वारा लिखा अवश्य पढूंगी !

vaidya surenderpal के द्वारा
September 21, 2013

बहुत सुन्दर रचना।

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 22, 2013

    प्रतिष्ठा में , vaidya surenderpal जी ,रचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए बहुत – बहुत धन्यवाद !

yogi sarswat के द्वारा
September 21, 2013

ब्लॉग एक माध्यम है लेखकों और कवियों के लिए अपने विचार व्यक्त करने का , अपनी बात कहने का , अपने अन्दर के झंझावात या गहरे भावों को शब्दों में बाँध कर लोगों तक पहुंचाने का और जब नव परिवर्तनों का दौर हो तो हमारे कवि और लेखक पीछे कैसे रह सकते हैं ? हिंदी एक बहुत ही मधुर ,सहज ,ग्राह्य और अपनत्वपूर्ण माध्यम है लोगों को लोगों से जोड़ने का | इस भाषा संग नित नए लेखक और कवि बढ़ रहे हैं | ब्लॉगिंग के जरिये एक मंच मिल जाता है , सबको जहां हम बेबाक हो अपनी बात रख सकते हैं | हर समय काल के साथ परिवर्तन अवश्यम्भावी है | स्वाभाविक है , हिंदी भी इससे अछूती नहीं रह सकती | नए लेखकों संग हिंदी को नया कलेवर ओढ़ना ही है , यह हर तरह से समृद्ध भाषा है इसी लिए यह श्रेष्ठ है | हिंदी ब्लोगिंग के पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत करती सार्थक पोस्ट ! बधाई आदरणीय जय श्री वर्मा जी आपको , बढ़िया लेखन के लिए

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 21, 2013

    प्रतिष्ठा में , योगी सारस्वत जी , इस रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद !

udayraj के द्वारा
September 21, 2013

हिंदी माला के मोती हैं ये , १३ स्वर और ३६ व्यंजन, ************ आँखें खोलीं तो माँ की गोदी, माँ की हिंदी और माँ की बोली, मातृ भाषा का मर्म पहचाना, हिंदी,हिन्दुस्तान को जाना । प्रदेश कई हैं और भाषा अनेक , पर इन सबमें सर्वश्रेष्ठ है एक , *********** गद्य और पद्य के मेल से मॉं, मातृभाषा और वतन को एकाकार करती हिंदी,  नव परिवर्तनों से गुजरती , एक सुंदर प्रस्‍तुति । बधाई ।

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 21, 2013

    प्रतिष्ठा में , udayraj जी , मेरी रचना पर इतने सुंदर शब्दों के साथ आपके विचारों के लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद !

jlsingh के द्वारा
September 21, 2013

बहुत सुन्दर व्याख्या ! बधाई!

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 21, 2013

    प्रतिष्ठा में , jlsingh जी ! आपका बहुत – बहुत धन्यवाद !

September 21, 2013

बहुत सुन्दर भावों को शब्दों में उतरा है आपने .बधाई .

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 21, 2013

    प्रतिष्ठा में ,शालिनी जी ! रचना पर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद !

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 20, 2013

मानव ने जैसे – जैसे विकास किया हिंदी भी साथ ही साथ नए – नए सोपान चढ़ती गई , नए इतिहास रचती गई और आज यह श्रेष्ठ और सर्व ग्राह्य भाषा बन कर उभरी है | यह हिन्दुस्तानियों के साथ जाकर विदेशों में भी बस गई है और वहां पर भी अपनी पहचान के साथ खुशहाल हो फल – फूल रही है | जय श्री जी सुन्दर रचना और लेख ..अपनी हिंदी और फले फूले हिंदी ब्लागिंग इसमें और सहयोग दे जन मन पुलकित हो तो आनंद और आये .. भ्रमर ५

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 21, 2013

    प्रतिष्ठा में ,सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर जी ! हमारी हिंदी नित – नित नए कलेवर ओढ़े यही हम सबकी कामना है , इस रचना पर आपके विचारों के लिए धन्यवाद !

yamunapathak के द्वारा
September 20, 2013

सुन्दर कविता. नव परिवर्तन की बयार है हिन्दी ब्लॉग्गिंग साभार

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 21, 2013

    प्रतिष्ठा में ,यमुना पाठक जी ! आपका बहुत – बहुत धन्यवाद !

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 20, 2013

हिंदी लेखक और हिंदी ब्लॉगिंग , भिन्न व्याख्या भिन्न भावों के रंग, नए विचार और नए लेखकों के ढंग , इठलाती है यह,हर नई कलम संग । मार्मिक पंक्तियाँ… बहुत सुन्दर आभार

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 21, 2013

    प्रतिष्ठा में , प्रदीप केसरवानी जी , लेख पर आपके विचार व्यक्त करने के लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद !

nishamittal के द्वारा
September 19, 2013

जय श्री जी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति बधाई

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 19, 2013

    प्रतिष्ठा में , निशा मित्तल जी , मेरी लेखनी पर आपके विचारों के लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद !

deepakbijnory के द्वारा
September 18, 2013

wah jayshree jee ek hi kavita me sampurna ras bhar diya badhai

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 19, 2013

    प्रतिष्ठा में , दीपक बिजनोरी जी , बहुत – बहुत धन्यवाद आपका इस प्रतिक्रिया के लिए !


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