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बातों से संसार - जयश्री वर्मा

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बातों की क्या कहिये,बातों का तो है अनंत अथाह संसार,
जन्म से मृत्यु तक,शब्दों से ही बंधा है जीने का आधार।

ये बातें तोतली जुबां मा,पा,ना,डा से शुरू जो होती हैं तो,
बुढ़ापे की ऊबी बेचैन,बुदबुदाहट पे ही समाप्त होती हैं।

हर किसी के जीवन के,कई पहलू की पहचान हैं ये बातें,
कभी मीठी कभी तीखी,और कभी चुगलखोर हैं ये बातें।

ये स्कूल, कालेज, ऑफिस में,शिकायत रूप में बसती हैं,
यहाँ आपकी मेहनत, ज़िम्मेदारी की पहचान हैं ये बातें।

ऑटो,बस,ट्रेन,पार्कों और कहीं किसी भी टिकट विंडो पर,
औपचारिक अपनत्व में मुस्कुराती,मेहमान सी हैं ये बातें।

अस्पताल,कचहरी,थाने या किसी दैवीय – प्रकोप के आगे,
बेबस सी सहमी आँखों में,आंसू संग सिसकती हैं ये बातें।

जीत की खुशियों भरी ठिठोली हो,या महफ़िलें सजीली हों,
उत्साह और उमंग में बहकती सी,खिलखिलाती हैं ये बातें।

पार्कों के झुरमुटों में, दरवाजों के कोनों और पर्दों के पीछे,
फुसफुसाती,लजाती,प्रेममय आवेग की परवान हैं ये बातें।

बातों के बादलों से ढंका,हर इंसान का जीवन आसमान है,
कहीं वर्षा,कहीं सूखा,कहीं आंधी और तूफ़ान सी हैं ये बातें।

उस परवरदिगार से जब कभी,किसी को संपर्क साधना हो,
गीता,कुरआन,बाइबिल,गुरुग्रंथ साहब में भगवान हैं ये बातें।

( जयश्री वर्मा )



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
September 9, 2013

बहुत सुन्दर .आभार

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 10, 2013

    प्रतिष्ठा में , शिखा कौशिक जी ! आपका बहुत – बहुत धन्यवाद !

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 10, 2013

    प्रतिष्ठा में ,ajaykr जी !कविता पर आपके विचारों का सदा ही स्वागत है !

Santlal Karun के द्वारा
September 6, 2013

आदरणीया जयश्री जी, ये बातें आप की बातें, जो बातें हैं बड़ी बातें, इन बातों का क्या कहना, ये और बातें हैं, ये जीवन की कहानी हैं, बयाँ जो बचपने की हैं, जवानी की, बुढ़ापे की, जनम से मरण तक की, ये बातें हैं, बातूनी हैं, ये बातें आप की बातें !  हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 7, 2013

    धन्यवाद आपका , आदरणीय santlal Karun जी ! बातों की रचना पर सुंदर बातों से जवाब देने के लिए !

deepakbijnory के द्वारा
September 3, 2013

कमाल का लिखती हैं आप जैश्री जी आपसे बहूत कुछ सीखना है मुझे

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 7, 2013

    धन्यवाद आपका , आदरणीय दीपक बिजनोरी जी ! मेरी लेखनी की तारीफ़ करने के लिए !

Madan Mohan saxena के द्वारा
September 3, 2013

वाह . कभी यहाँ भी पधारें

    Jaishree Verma के द्वारा
    September 7, 2013

    कविता पर ध्यान देने के लिए आपका शुक्रिया मदन मोहन सक्सेना जी , मैं आपकी रचनाएं पढ़ती हूँ और उसपर अपने विचार भी व्यक्त करती हूँ ,पर आपकी पोस्ट पर मेरे लिखे विचार शो नहीं होते , मैंने कई बार कोशिश की पर असमर्थ रही !


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