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वर्षा की आस

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गरज -गरज कर मेघा बरसे,
तब क्यों प्यासी धरती तरसे,
कुछ नदियों की शान बढ़ेगी,
कुछ नालों की साख चढ़ेगी,
जब खेत तृप्त हों कोंपल उगलें,
हम हरियाली आँखों में भर लें,
फिर तो धरा इठलाएगी ऐसे,
नवेली हरी ओढ़नी ओढ़े जैसे,
कृषक की सूनी आँखें देखो,
तृप्त-तृप्त सी छटा लिए,
धनधान्य से भरा हो घर,
हृदय में आशाएं जिए हुए,
रंग बिरंगे फिर फूल खिलेंगे,
फूलों के बदले में फल मिलेंगे,
तब त्योहारों की धूम रहेगी,
मन खुशियों की धार बहेगी,
लक्ष्मी छन-छन घर आएगी,
मुनिया पढ़ने स्कूल जाएगी,
क ख ग घ-पढ़ लिखकर वो,
अफसर,मास्टरनी बन जाएगी,
कंगन घर वाली को दूंगा,
सबके कपड़े सिलवाऊंगा,
मेघा जल भर -भरकर लाओ,
प्यासी धरती की प्यास बुझाओ,
टिप-टिप,टप-टप, छप-छप,छपाक,
बन्ना,कजरी,दादरा,सोहर के राग,
खिलते-इठलाते बगिया और बाग,
बाजरा,मेथी,मक्का,सरसों का साग,
मेड़ पे दौड़ें,मुन्ना, मुन्नी खेलें,
बापू मुझको,अपनी गॊद में लेले,
गुन-गुन करती घरवाली जाए,
खेतों में जब हरियाली छाए।
( जयश्री वर्मा )

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
June 9, 2014

आदरणीया आज मैंने आप के सभी २१ ब्लॉग पढ़े.सादर, भूखे मन -मश्तिष्क को तृप्ति मिली.

    Jaishree Verma के द्वारा
    June 9, 2014

    प्रतिष्ठा में, pkdubey जी, मेरे लेखन की सराहना के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !

bdsingh के द्वारा
August 11, 2013

वर्षा , खेती ,किसान की खुशहाली ,धरती में छाये हरियाली। सुन्दर कविता

    Jaishree Verma के द्वारा
    June 9, 2014

    प्रतिष्ठा में, bdsingh जी, कविता पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !

yogi sarswat के द्वारा
June 20, 2013

धनधान्य से भरा हो घर, हृदय में आशाएं जिए हुए, रंग बिरंगे फिर फूल खिलेंगे, फूलों के बदले में फल मिलेंगे, तब त्योहारों की धूम रहेगी, मन खुशियों की धार बहेगी, लक्ष्मी छन-छन घर आएगी, मुनिया पढ़ने स्कूल जाएगी, क ख ग घ-पढ़ लिखकर वो, अफसर,मास्टरनी बन जाएगी, कंगन घर वाली को दूंगा, सबके कपड़े सिलवाऊंगा, स्वागत ! बहुत सुन्दर शब्द लिखे हैं आपने आदरणीय जय श्री जी

    Jaishree Verma के द्वारा
    June 20, 2013

    योगी जी , इस कविता पर सुखद प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए आपका धन्यवाद !

priti के द्वारा
June 18, 2013

प्रकृति का अति सुन्दर चित्रण ! हार्दिक बधाई ! जयश्री जी …

    Jaishree Verma के द्वारा
    June 19, 2013

    प्रीति जी,आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।

shalinikaushik के द्वारा
June 18, 2013

CHALIYE JAYSHREE JI AB YE AAS PORI HO JAYEGI .JETH KE MAHINE ME HI DHARTI KEE PYAS BADAL BUJHA RAHE HAIN .SARTHAK BHAVNATMAK ABHIVYAKTI .BADHAI .

    Jaishree Verma के द्वारा
    June 18, 2013

    Jee haan Shalini ji ! Jeth ke mahine men hi baadal baras rahen hain per kuchh jaada hi,itne ki ummeed nahin ki thi hamne.

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
June 14, 2013

आपके पहले पोस्ट पर पहली प्रतिक्रिया- वर्षा का सजीव चित्रण किया है आपने / बहुत सुन्दर /

    Jaishree Verma के द्वारा
    June 17, 2013

    आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।


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